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News1806-02-2026, 09:23

गेहूं में रतुआ रोग का प्रकोप: पलामू वैज्ञानिक की सलाह, इंडोफिल-45 से करें छिड़काव

  • झारखंड और बिहार में देर से बोई गई गेहूं की फसल (दिसंबर-जनवरी) रतुआ रोग से प्रभावित होती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है.
  • किसान अक्सर पौधों के पीले पड़ने और विकास रुकने को पोषक तत्वों की कमी मानते हैं, जबकि असली कारण रतुआ रोग होता है.
  • कृषि विज्ञान केंद्र, पलामू के वैज्ञानिक उदय कुमार सिंह के अनुसार, तापमान और आर्द्रता के कारण देर से बोई गई गेहूं में रतुआ रोग अधिक होता है.
  • रोग के मुख्य लक्षण पत्तियों पर पीले या जंग जैसे धब्बे हैं, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और उनकी वृद्धि रुक जाती है.
  • नियंत्रण के लिए 1 लीटर पानी में 2 ग्राम इंडोफिल-45 या साफ दवा मिलाकर छिड़काव करें; 15-20 दिन के अंतराल पर दोहराने से 80-90% रोग नियंत्रित होता है.

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