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मंत्रों के बिना, केवल भावना से पूजा! गणगौर पर लोकगीतों से गूंजता है मध्य प्रदेश का यह अनोखा गांव
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बिना मंत्र, सिर्फ भाव से पूजा! गणगौर में लोकगीतों के बीच झूम उठता MP का ये गांव.
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News18
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20-03-2026, 07:28
बिना मंत्र, सिर्फ भाव से पूजा! गणगौर में लोकगीतों के बीच झूम उठता MP का ये गांव.
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मध्य प्रदेश के निमाड़ और मालवा क्षेत्रों में गणगौर को सबसे बड़ा लोकपर्व माना जाता है, जिसका लोग साल भर इंतजार करते हैं.
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इस पर्व में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में हर शाम झलारिया करती हैं और घर-घर में उत्सव का माहौल होता है.
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गणगौर की सबसे अनोखी परंपरा 'रथ बोड़ाने' की है, जिसमें मनोकामना पूरी होने पर भक्त रथ को घर ले जाते हैं.
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निमाड़ में गणगौर पूरी तरह से लोकपर्व के रूप में मनाया जाता है, जिसमें चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी से ज्वारे बोए जाते हैं.
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इस पर्व में मंत्रों या विस्तृत अनुष्ठानों के बजाय लोक परंपराओं और भक्ति के साथ पूजा की जाती है, जिसमें गौरा को बेटी की तरह माना जाता है.
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