अररिया में 200 साल पुरानी 'दोस्ती का मेला' परंपरा आज भी जीवित.

अररिया
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News18•02-01-2026, 16:33
अररिया में 200 साल पुरानी 'दोस्ती का मेला' परंपरा आज भी जीवित.
- •अररिया के रानीगंज में फरियानी नदी के किनारे पौष पूर्णिमा पर 200 साल पुराना 'दोस्ती का मेला' लगता है, जहाँ लोग नदी में स्नान कर आजीवन दोस्ती निभाते हैं.
- •यह परंपरा 1780-1800 के बीच महारानी इंद्रावती के शासनकाल में शुरू हुई थी, जब लोग उनके साथ यमुना घाट पर स्नान कर संबंध बनाते थे.
- •मेले का मैदान 100-150 एकड़ से घटकर कुछ एकड़ रह गया है, फिर भी किफायती लकड़ी के सामान और घरेलू वस्तुओं के लिए इसकी लोकप्रियता बरकरार है.
- •यह मेला मध्यम और गरीब परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ 15,000-20,000 रुपये में शादी के लिए लकड़ी के सामान का पूरा सेट मिलता है.
- •विभिन्न जिलों से बढ़ई यहाँ दुकानें लगाते हैं, जो कम कीमत पर लकड़ी के उत्पाद उपलब्ध कराते हैं, जिससे पारंपरिक और व्यावहारिक दोनों जरूरतें पूरी होती हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: अररिया का 'दोस्ती का मेला' 200 साल पुरानी दोस्ती की परंपरा और किफायती लकड़ी के सामान का संगम है.
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