माता-पिता को श्रद्धांजलि: अशोक निशांत की 'चित्त प्रलाप' आधुनिक श्रवण कुमार की कहानी.

मुजफ्फरपुर
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News18•10-01-2026, 15:26
माता-पिता को श्रद्धांजलि: अशोक निशांत की 'चित्त प्रलाप' आधुनिक श्रवण कुमार की कहानी.
- •मुजफ्फरपुर के लेखक अशोक निशांत ने अपने दिवंगत माता-पिता, जगदंबी सिंह और फूलगेंद देवी को श्रद्धांजलि के रूप में 'चित्त प्रलाप' लिखी है.
- •299 पृष्ठों की इस पुस्तक में 33 अध्याय हैं, जिसमें 2009 और 2020 में माता-पिता के निधन के बाद उनकी यादें, शिक्षाएँ और स्नेह संजोए गए हैं.
- •निशांत के कार्य की तुलना श्रवण कुमार से की जाती है, क्योंकि उन्होंने साहित्य के माध्यम से अपने माता-पिता की यादों को अमर कर कृतज्ञता व्यक्त की है.
- •'चित्त प्रलाप' में व्यक्तिगत कहानियों के अलावा समकालीन समाज, युवा, बुजुर्गों के संघर्ष, महिलाओं के मुद्दे, हास्य और व्यंग्य पर भी कहानियाँ हैं.
- •राजमंगल पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक 359 रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध है, जिससे निशांत एक आधुनिक श्रवण पुत्र के रूप में जाने जाते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: अशोक निशांत की 'चित्त प्रलाप' अपने माता-पिता को एक मार्मिक साहित्यिक श्रद्धांजलि है, जो आधुनिक filial भक्ति का प्रतीक है.
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