आदिवासियों की आजीविका संकट में: 10 किमी का सफर, 1 रुपये में बिकती पत्तल

जमुई
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News18•28-01-2026, 13:46
आदिवासियों की आजीविका संकट में: 10 किमी का सफर, 1 रुपये में बिकती पत्तल
- •जमुई जिले के बिनझी गांव के आदिवासी समुदाय जंगल पर निर्भर हैं और पत्तल बनाने का काम करते हैं.
- •सुनीता टुडू जैसी ग्रामीण महिलाएं जंगल से साल के पत्ते इकट्ठा करती हैं, जो कांटों और जंगली जानवरों के डर के बीच एक कठिन काम है.
- •पत्तल बनाने के बाद, ग्रामीण शीतल सोरेन जैसे लोग उन्हें 10 किमी दूर बटिया बाजार ले जाते हैं और 1-2 रुपये प्रति पत्तल बेचते हैं.
- •थर्मोकोल और मशीन से बनी प्लेटों के बढ़ते उपयोग के कारण पारंपरिक पत्तल की मांग कम हो गई है, जिससे आदिवासियों की आय प्रभावित हुई है.
- •पारंपरिक तरीकों से पत्तल बनाने वाले कारीगरों को समर्थन देने की तत्काल आवश्यकता है, जो कम आय और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मशीनी प्रतिस्पर्धा के कारण जमुई में पारंपरिक पत्तल बनाने वालों की आजीविका और मांग घट रही है.
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