इस्तीफा ठुकराना बंधुआ मजदूरी जैसा, केरल हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी. (Image:AI)
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News1817-02-2026, 16:24

केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कर्मचारी का इस्तीफा मौलिक अधिकार, बंधुआ मजदूर नहीं.

  • केरल हाईकोर्ट ने कहा कि बिना ठोस कारण कर्मचारी का इस्तीफा न मानना 'बंधुआ मजदूरी' के समान है.
  • न्यायमूर्ति एन. नागेश ने कहा कि किसी को उसकी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर करना संविधान के अनुच्छेद 23 का उल्लंघन है.
  • इस्तीफा केवल अनुबंध शर्तों के उल्लंघन, अनिवार्य नोटिस अवधि या गंभीर कदाचार के मामलों में रोका जा सकता है.
  • यह मामला ट्रेको केबल कंपनी लिमिटेड के कंपनी सचिव ग्रीवास जॉब पनाक्कल से संबंधित था, जिनका इस्तीफा बकाया वेतन के बावजूद खारिज कर दिया गया था.
  • कोर्ट ने ट्रेको केबल कंपनी लिमिटेड को इस्तीफा स्वीकार करने, कर्मचारी को राहत देने और सभी बकाया भुगतान करने का आदेश दिया.

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