रविंद्र ने मक्के की रोटी, माड़-भात और सत्तू खाकर अपनी पढ़ाई पूरी की.
शिक्षा
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News1822-12-2025, 12:32

मजदूर का बेटा बना दारोगा: गरीबी में सत्तू खाकर किया संघर्ष, ताने मारने वालों को दिया जवाब.

  • गया के कुइबर गांव के रविंद्र पंडित, एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे, ने गरीबी को हराकर बिहार पुलिस में दारोगा का पद हासिल किया.
  • उन्होंने बच्चों को पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्च उठाया और आर्थिक तंगी के कारण सत्तू व मक्के की रोटी खाकर गुजारा किया.
  • गांव वालों के ताने कि 'मजदूर का बेटा मजदूर ही बनेगा' को रविंद्र ने अपनी कड़ी मेहनत और सफलता से गलत साबित किया.
  • रेलवे ग्रुप डी में नौकरी मिलने के बाद भी, मां के प्रोत्साहन से रविंद्र ने दारोगा बनने का सपना पूरा किया.
  • रविंद्र की कहानी दर्शाती है कि गरीबी सफलता की राह में बाधा नहीं है, बल्कि दृढ़ संकल्प और संघर्ष से कुछ भी संभव है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: रविंद्र पंडित की कहानी बताती है कि गरीबी और ताने भी दृढ़ संकल्प के आगे नहीं टिकते.

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