छत्तीसगढ़ का छेरछेरा पर्व: दान, एकता और फसल के उल्लास का प्रतीक

जांजगीर
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News18•02-01-2026, 12:18
छत्तीसगढ़ का छेरछेरा पर्व: दान, एकता और फसल के उल्लास का प्रतीक
- •छेरछेरा छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण फसल कटाई के बाद का त्योहार है, जिसे 'दान का महापर्व' भी कहते हैं, यह पौष पूर्णिमा पर मनाया जाता है.
- •यह किसानों की कड़ी मेहनत, सामूहिक खुशी और सामाजिक एकता का प्रतीक है, जो पूरे गांव में भाईचारे का संदेश देता है.
- •बच्चे और युवा घर-घर जाकर "छेरछेरा माई, कोठी के धान ला हेर ते हेरा" कहते हुए धान, चावल, पैसे या चॉकलेट दान के रूप में प्राप्त करते हैं.
- •त्योहार का उद्देश्य सामाजिक असमानता को दूर करना और समाज में समानता की भावना को मजबूत करना है.
- •पंडित बसंत शर्मा महाराज के अनुसार, यह गांव की एकता, फसल के उल्लास और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा का जीवंत प्रतीक है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: छेरछेरा छत्तीसगढ़ का अनूठा फसल उत्सव है जो दान, एकता और सामाजिक समानता को बढ़ावा देता है.
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