दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अबॉर्शन के लिए पति की सहमति अनिवार्य नहीं है.
दिल्ली
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News1808-01-2026, 20:33

अबॉर्शन के लिए पति की अनुमति नहीं! दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला के अधिकार को किया स्पष्ट.

  • दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अबॉर्शन के लिए पति की अनुमति अनिवार्य नहीं है, महिला के प्रजनन अधिकार को मजबूत किया.
  • कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक कलह में महिला को गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर करना उसके शारीरिक अखंडता का उल्लंघन है.
  • एक महिला को IPC की धारा 312 के तहत लगे आरोपों से बरी किया, जिसने वैवाहिक तनाव के बीच 14 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त की थी.
  • जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अनुच्छेद 21 के तहत महिला की प्रजनन स्वायत्तता पर जोर दिया, MTP एक्ट का उद्देश्य महिला के स्वास्थ्य की रक्षा करना है.
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक कलह में मानसिक तनाव और भावनात्मक दूरी भी शामिल है, जिससे महिलाएं MTP नियम 3-B(c) के तहत पात्र हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: दिल्ली हाई कोर्ट ने अबॉर्शन पर महिला के निर्णय को सर्वोपरि मानते हुए उसके प्रजनन अधिकारों को मजबूत किया.

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