बर्दवान विश्वविद्यालय: शाही उद्यान से आधुनिक ज्ञान के केंद्र तक का सफर

शिक्षा और करियर
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News18•02-02-2026, 19:23
बर्दवान विश्वविद्यालय: शाही उद्यान से आधुनिक ज्ञान के केंद्र तक का सफर
- •बर्दवान विश्वविद्यालय का गोलापबाग परिसर कभी बर्दवान शाही परिवार का निजी 'दिलखुशा गार्डन' या 'दार-उल-बहार' था.
- •राजा बिजय चंद महताब ने 1884 में गोलापबाग की स्थापना की, जिसमें विभिन्न प्रकार के गुलाब के पौधे, पेड़, जल संरचनाएं और एक हवा महल था.
- •इस उद्यान में एक चिड़ियाघर भी था, जिसे बाद में कोलकाता के अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन में स्थानांतरित कर दिया गया.
- •1950 के दशक में जमींदारी उन्मूलन के बाद, राजा उदय चंद महताब ने अपनी अधिकांश संपत्ति राज्य सरकार को दान कर दी.
- •पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय की योजना के तहत यह बर्दवान विश्वविद्यालय में बदल गया, जहाँ हवा महल आज भी खड़ा है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बर्दवान विश्वविद्यालय का गोलापबाग परिसर एक शाही उद्यान से शिक्षा के केंद्र में विकसित होने का समृद्ध इतिहास रखता है.
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