मंदिर का पुजारी केवल पूजा-पाठ कराने वाला 'देवता का सेवक' होता है, वह मंदिर या उससे जुड़ी भूमि पर स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता है. (Photo: AI)
अहमदाबाद
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News1823-01-2026, 14:53

गुजरात हाईकोर्ट का अहम फैसला: पूजा करने से मंदिर की जमीन पर मालिकाना हक नहीं

  • गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि मंदिर का पुजारी केवल 'देवता का सेवक' होता है और मंदिर या उसकी जमीन पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता.
  • जस्टिस जे.सी. दोशी की एकल पीठ ने अहमदाबाद में सार्वजनिक सड़क पर बने गणेश मंदिर की जमीन पर मालिकाना हक का दावा करने वाले पुजारी की अपील खारिज कर दी.
  • पुजारी ने लंबे समय से पूजा और निवास के आधार पर प्रतिकूल कब्जे का दावा किया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि उसका कब्जा शत्रुतापूर्ण नहीं था.
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक सेवा करने से जमीन पर कानूनी अधिकार नहीं बनते और सार्वजनिक संपत्ति पर अनधिकृत ढांचों को संरक्षित नहीं किया जा सकता.
  • विवाद तब शुरू हुआ जब एक भूस्वामी ने मंदिर हटाने की मांग की, जिसके बाद निचली अदालतों ने इसे गिराने का आदेश दिया था.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: गुजरात हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुजारी देवता का सेवक है, मालिक नहीं, और पूजा से जमीन पर मालिकाना हक नहीं मिलता.

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