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फतेहपुर बिल्लौच: मुस्लिम बिल्लौचों के दबदबे और मूक फिल्मों की अनोखी कहानी जानें.
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फरीदाबाद का फतेहपुर बिल्लौच: मूक फिल्मों से फूलों की खेती तक, एक अनोखे गांव की कहानी.
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News18
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07-03-2026, 14:00
फरीदाबाद का फतेहपुर बिल्लौच: मूक फिल्मों से फूलों की खेती तक, एक अनोखे गांव की कहानी.
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फरीदाबाद का फतेहपुर बिल्लौच गांव हजारों साल पुराना है, जिसने मुस्लिम शासन, देश का विभाजन और आधुनिक विकास देखा है.
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गांव का नाम मुस्लिम बिल्लौच समुदाय के दबदबे के कारण पड़ा; 1947 के विभाजन के बाद यहां बड़े बदलाव आए और 1952 में पहली पंचायत बनी.
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आज गांव में स्कूल, अस्पताल, आईटीआई और स्पोर्ट्स स्टेडियम जैसी आधुनिक सुविधाएं हैं, जहां 20,000 की आबादी बिना किसी जातिगत संघर्ष के सद्भाव से रहती है.
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यह गांव फूलों की खेती (विशेषकर रजनीगंधा) के लिए जाना जाता है; 1957 में बिजली आई और यह जूते, पूड़ा और बताशा के लिए भी प्रसिद्ध था.
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फतेहपुर बिल्लौच में कभी मूक फिल्में दिखाई जाती थीं और बेगम सुरैया जैसी हस्तियां भी यहां आ चुकी हैं, जो इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं.
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