खेमराज सुंडरियाल: गरीबी से पद्मश्री तक, हथकरघा उद्योग में क्रांति लाने वाले कलाकार

पानीपत
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News18•26-01-2026, 19:15
खेमराज सुंडरियाल: गरीबी से पद्मश्री तक, हथकरघा उद्योग में क्रांति लाने वाले कलाकार
- •पानीपत, हरियाणा के 84 वर्षीय बुनकर खेमराज सुंडरियाल को हथकरघा उद्योग में 60 वर्षों के योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है.
- •उन्होंने पारंपरिक जामदानी कला को मलमल के बजाय ऊनी शॉल पर प्रयोग करके एक क्रांतिकारी नवाचार किया, जो उद्योग के लिए मील का पत्थर साबित हुआ.
- •सुंडरियाल ने एम.एफ. हुसैन की पेंटिंग्स को बुने हुए टेपेस्ट्री के रूप में इतनी सजीवता से बनाया कि उन्हें मूल कलाकृतियों से अलग करना मुश्किल था.
- •उन्होंने पानीपत में 'खेस' बुनाई को बेडशीट और बेड कवर जैसे उत्पादों में बदलकर उद्योग को नया बाजार दिया और टेपेस्ट्री कला को विकसित किया.
- •सुंडरियाल ने पानीपत में स्थायी रंगाई को बढ़ावा दिया, कारीगरों को प्रशिक्षित किया और वीवर्स सर्विस सेंटर से जुड़कर हजारों बुनकरों के जीवन को बदला.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: खेमराज सुंडरियाल को भारत के हथकरघा उद्योग में उनके आजीवन नवाचार और उत्थान के लिए पद्मश्री मिला है.
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