गुमला में ड्रोन तकनीक से खेती में क्रांति: 10 मिनट में छिड़काव, बंपर पैदावार

गुमला
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News18•20-01-2026, 23:19
गुमला में ड्रोन तकनीक से खेती में क्रांति: 10 मिनट में छिड़काव, बंपर पैदावार
- •गुमला के किसान पारंपरिक खेती पर निर्भर हैं, लेकिन ड्रोन तकनीक कृषि पद्धतियों को आधुनिक बनाने के लिए तैयार है.
- •ड्रोन से छिड़काव 8-10 मिनट में एक एकड़ को कवर करता है, जिससे मैन्युअल तरीकों की तुलना में समय, पानी और कीटनाशकों का उपयोग काफी कम हो जाता है.
- •पारंपरिक छिड़काव में प्रति हेक्टेयर 250-500 लीटर पानी का उपयोग होता है, जबकि ड्रोन प्रति एकड़ केवल 10 लीटर का उपयोग करते हैं, बूंदों को बेहतर कवरेज के लिए परमाणु बनाते हैं.
- •उच्च दबाव वाला ड्रोन छिड़काव सुनिश्चित करता है कि कीटनाशक और उर्वरक पौधों तक प्रभावी ढंग से पहुंचें, जिससे बेहतर विकास हो और फसल को नुकसान कम हो.
- •यह तकनीक श्रम, पानी, दवा और समय की बचत करती है, जिससे फसल की पैदावार बढ़ती है और गुमला के किसान इसे अपना रहे हैं, सरकार "ड्रोन दीदी" प्रशिक्षण के लिए सहायता प्रदान कर रही है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: ड्रोन तकनीक गुमला के किसानों को फसल की पैदावार बढ़ाने और संसाधनों को बचाने का एक तेज़, कुशल और लागत प्रभावी तरीका प्रदान करती है.
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