नेताजी सुभाष चंद्र बोस: तीन 'बाबाओं' का रहस्य और अनसुलझे सवाल
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News1822-01-2026, 19:09

नेताजी सुभाष चंद्र बोस: तीन 'बाबाओं' का रहस्य और अनसुलझे सवाल

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 1945 में ताइहोकू, ताइवान में विमान दुर्घटना में कथित मौत पर व्यापक रूप से अविश्वास किया गया, जिससे उनके जीवित होने के कई दावे सामने आए.
  • 1950 और 1980 के दशक के बीच, तीन 'बाबाओं' - शालमारी आश्रम के स्वामी शारदानंद, नागदा के स्वामी ज्योतिर्देव और फैजाबाद के गुमनामी बाबा - को व्यापक रूप से नेताजी माना जाता था.
  • स्वामी शारदानंद, जो अंग्रेजी और बंगाली में धाराप्रवाह थे, हमेशा अपना चेहरा ढके रहते थे और तस्वीरें खिंचवाने से बचते थे, जिससे नेताजी के कई करीबी सहयोगियों को विश्वास हो गया कि वह सुभाष थे.
  • फैजाबाद के गुमनामी बाबा, सबसे चर्चित व्यक्ति थे, जिनके पास सुभाष की पारिवारिक तस्वीरें, किताबें, गोल चश्मे और महंगी वस्तुएं थीं, जिससे अटकलें तेज हो गईं.
  • न्यायमूर्ति मनोज मुखर्जी आयोग (1999) और विष्णु सहाय आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि कोई भी 'बाबा' सुभाष नहीं थे, जिसमें हस्तलेख, दंत डीएनए और अन्य सबूतों के मिलान की कमी का हवाला दिया गया.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: व्यापक विश्वास और अटकलों के बावजूद, जांच में निष्कर्ष निकला कि तीनों 'बाबाओं' में से कोई भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस नहीं थे.

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