चकोर: शुगर, खांसी और त्वचा रोगों का आयुर्वेदिक रामबाण, विंध्य क्षेत्र में आजीविका का स्रोत

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News18•04-02-2026, 11:37
चकोर: शुगर, खांसी और त्वचा रोगों का आयुर्वेदिक रामबाण, विंध्य क्षेत्र में आजीविका का स्रोत
- •चकोर, जिसे संस्कृत में चक्रमर्द कहते हैं, मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक औषधीय पौधा है, जो आयुर्वेद में अत्यधिक महत्वपूर्ण है.
- •आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. विपिन सिंह के अनुसार, चकोर मधुमेह, खांसी, गले के संक्रमण और विभिन्न त्वचा रोगों के लिए फायदेमंद है.
- •इसकी पत्तियों का काढ़ा कफ वाली खांसी में राहत देता है, और पत्ती का रस लगातार सर्दी और गले की सूजन के लिए प्रभावी है.
- •दाद, खुजली और चकत्ते जैसे त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए, चकोर के बीजों को दही के साथ पीसकर लगाने से आराम मिलता है; पत्ती और बीज का रस मधुमेह रोगियों के लिए भी सहायक है.
- •चकोर आदिवासी समुदायों के लिए आजीविका का स्रोत भी है, जो इसके सूखे पौधों से बीज इकट्ठा कर 250-300 रुपये प्रति किलोग्राम पर बेचते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ होता है.
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