टाइप 1.5 डायबिटीज वयस्कों में होने वाली ऑटोइम्यून डिजीज है.
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News1829-01-2026, 10:52

टाइप 1.5 डायबिटीज: एक छिपी हुई ऑटोइम्यून बीमारी जिसे जानना ज़रूरी है

  • टाइप 1.5 डायबिटीज, जिसे चिकित्सकीय रूप से लैटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज इन एडल्ट्स (LADA) के नाम से जाना जाता है, टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज दोनों की विशेषताओं वाली एक ऑटोइम्यून बीमारी है.
  • इसके लक्षण, जैसे बढ़ी हुई प्यास, बार-बार पेशाब आना और वजन कम होना, आमतौर पर 30 से 50 वर्ष की आयु के बीच दिखाई देते हैं, जिससे अक्सर इसे शुरू में टाइप 2 डायबिटीज समझ लिया जाता है.
  • टाइप 1 के विपरीत, LADA में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं का विनाश धीमी गति से होता है, जिससे शरीर शुरू में कुछ इंसुलिन का उत्पादन करता रहता है और इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता में देरी होती है.
  • निदान में ऑटोइम्यून एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए GAD एंटीबॉडी टेस्ट और अग्न्याशय द्वारा इंसुलिन उत्पादन को मापने के लिए C-पेप्टाइड टेस्ट शामिल है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह टाइप 1 या टाइप 2 नहीं है.
  • उपचार में अक्सर शेष अग्नाशयी कोशिकाओं को संरक्षित करने और किडनी क्षति, आंखों की समस्याओं और तंत्रिका क्षति जैसी गंभीर जटिलताओं को रोकने के लिए शुरुआती इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता होती है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: टाइप 1.5 डायबिटीज (LADA) एक ऑटोइम्यून स्थिति है जिसके प्रभावी प्रबंधन के लिए शीघ्र निदान और इंसुलिन थेरेपी आवश्यक है.

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