सतना की अनामिका सिंह बघेल: उम्र को बनाया ताकत, रंगमंच को दिलाई नई पहचान

सतना
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News18•20-01-2026, 21:08
सतना की अनामिका सिंह बघेल: उम्र को बनाया ताकत, रंगमंच को दिलाई नई पहचान
- •सतना की अनामिका सिंह बघेल ने सामाजिक ताने-बाने को दरकिनार कर रंगमंच के प्रति अपने जुनून से उम्र को सिर्फ एक संख्या साबित किया है.
- •बचपन से ही कला से जुड़ी अनामिका ने स्कूल और कॉलेज के दौरान नृत्य-नाटकों और सांस्कृतिक प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लिया.
- •एमए संगीत, एमए हिंदी साहित्य और बी.एड. जैसी कई डिग्रियों और पीआरओ की जिम्मेदारी के बावजूद, वह खुद को एक रंगमंच कलाकार मानती हैं.
- •शादी और मातृत्व के कारण 5-6 साल के अंतराल के बाद, उन्होंने WITS कॉलेज में रंगमंच से फिर से जुड़कर तकनीकी बारीकियां सीखीं.
- •उनका प्रशंसित नाटक "आनंद रघुनंदन" देश भर में 20 बार मंचित हो चुका है और NSD Repertory में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके लिए उन्हें विंध्य गौरव पुरस्कार मिलेगा.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: अनामिका सिंह बघेल का जीवन दर्शाता है कि दृढ़ संकल्प और जुनून से उम्र कोई बाधा नहीं होती है.
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