भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A पर क्या है सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की अलग-अलग राय
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News1813-01-2026, 18:46

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A पर सुप्रीम कोर्ट में मतभेद, अब बड़ी बेंच करेगी फैसला.

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने खंडित फैसला सुनाया है, जिससे संवैधानिक टकराव पैदा हो गया है.
  • जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने धारा 17A को असंवैधानिक बताया, उनका तर्क है कि यह भ्रष्टों को बचाता है और जांच में बाधा डालता है, जिससे पहले रद्द की गई सुरक्षा ढालें फिर से जीवित हो गई हैं.
  • जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने धारा 17A को सीमित दायरे में वैध माना, उन्होंने नीतिगत पंगुता को रोकने के लिए ईमानदार सरकारी कर्मचारियों को मनमानी जांच से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
  • धारा 17A सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू करने से पहले सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य करती है, खासकर जब आरोप उनके आधिकारिक निर्णयों से संबंधित हों.
  • यह मामला अब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को भेजा गया है, जो एक बड़ी बेंच का गठन करेंगे, जो इसके महत्वपूर्ण कानूनी और संवैधानिक निहितार्थों को दर्शाता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सुप्रीम कोर्ट के जजों में धारा 17A की संवैधानिकता पर मतभेद, भ्रष्टाचार जांच और लोक सेवक सुरक्षा पर सवाल.

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