यूजीसी के सेक्शन 3(c) पर सुप्रीम कोर्ट की रोक: हाईकोर्ट के फैसलों से टकराव का डर

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News18•30-01-2026, 09:13
यूजीसी के सेक्शन 3(c) पर सुप्रीम कोर्ट की रोक: हाईकोर्ट के फैसलों से टकराव का डर
- •यूजीसी के प्रस्तावित 2026 नियमों का सेक्शन 3(c) जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को व्यापक बनाता है, जिसमें शिकायतकर्ता की भावना के आधार पर अपमान या मानसिक उत्पीड़न शामिल है.
- •यह सेक्शन दो हाईकोर्ट के फैसलों से सीधे टकराता है, जिनमें कहा गया था कि दुर्व्यवहार को जाति-आधारित साबित करना होगा, न कि केवल व्यक्तिगत विवाद, ताकि वह SC-ST एक्ट के तहत आए.
- •सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट ने सेक्शन 3(c) की अस्पष्टता और इसके दुरुपयोग व 'रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन' की संभावना पर चिंता व्यक्त की.
- •कोर्ट ने परिसरों में जातिगत भेदभाव की वास्तविकता (जैसे रोहित वेमुला, पायल तडवी मामले) को स्वीकार किया, लेकिन जोर दिया कि समाधान स्पष्ट और कानूनी रूप से सही होने चाहिए, न कि भावनाओं पर आधारित.
- •सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी, 2026 को अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए 2026 के नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी और पुराने 2012 के नियमों को जारी रखने का आदेश दिया; अगली सुनवाई 19 मार्च को है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों के सेक्शन 3(c) को अस्पष्टता और हाईकोर्ट के फैसलों से टकराव के डर से रोक दिया.
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