आलू के नुकसान के बाद मटर की खेती से जलपाईगुड़ी के किसानों को मिली 'हरी उम्मीद'.

उत्तर बंगाल
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News18•24-12-2025, 16:56
आलू के नुकसान के बाद मटर की खेती से जलपाईगुड़ी के किसानों को मिली 'हरी उम्मीद'.
- •जलपाईगुड़ी के किसान आलू की खेती में हुए भारी नुकसान के बाद तीस्ता नदी के किनारे मटर की खेती अपना रहे हैं.
- •बेमौसम भारी बारिश के कारण तीस्ता का जलस्तर बढ़ने से आलू के खेत डूब गए थे, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ.
- •मटर की खेती में कम खाद की आवश्यकता होती है और तीस्ता नदी के किनारे की मिट्टी में अच्छी उपज होती है, जिसकी मांग असम और कोलकाता के बाजारों में है.
- •लगभग 1,000 एकड़ तीस्ता नदी के किनारे अब मटर की खेती के लिए समर्पित है, जो किसानों के लिए 'हरी उम्मीद' लेकर आई है.
- •जिला बागवानी विभाग के अनुसार, जिले में 2700 हेक्टेयर भूमि पर मटर की खेती होती है, जिससे लगभग 22,300 मीट्रिक टन उत्पादन होता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मटर की खेती जलपाईगुड़ी के किसानों को आलू की फसल के नुकसान से उबरने का लाभदायक विकल्प दे रही है.
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