हाड़ी रानी का अद्वितीय बलिदान: कर्तव्य और प्रेम के लिए कटा शीश.

कोटा
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News18•22-12-2025, 16:24
हाड़ी रानी का अद्वितीय बलिदान: कर्तव्य और प्रेम के लिए कटा शीश.
- •हाड़ी रानी, मूल रूप से बूंदी की सालेह कंवर, का विवाह मेवाड़ के प्रमुख कमांडर राव रतनसिंह चूंडावत से हुआ था.
- •औरंगजेब ने चंचल कुमारी के विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार करने पर रूपनगर पर हमला किया, जिसके बाद चंचल कुमारी ने राणा राजसिंह से मदद मांगी.
- •राणा राजसिंह ने राव रतनसिंह चूंडावत को युद्ध के लिए बुलाया, जिससे उनके सालुम्बर में गृहप्रवेश समारोह में बाधा पड़ी.
- •अपने पति के कर्तव्य में बाधा न बने, इसके लिए हाड़ी रानी ने प्रेम और बलिदान के प्रतीक के रूप में अपना सिर काट दिया.
- •राव रतनसिंह ने उनके रक्त से तिलक लगाकर बदला लेने की शपथ ली और मुगल सेना को बहादुरी से हराया.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: हाड़ी रानी का कर्तव्य और प्रेम के लिए अपने सिर का अद्वितीय बलिदान साहस की अमर गाथा है.
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