विजय और शौर्य का प्रतीक
भरतपुर
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News1823-01-2026, 09:34

बसंत पंचमी पर महाराजा सूरजमल ने रखी थी अजेय लोहागढ़ की नींव, जानें गौरव गाथा.

  • महाराजा सूरजमल ने 1743 में बसंत पंचमी के दिन अजेय लोहागढ़ किले की नींव रखी थी, जो ज्ञान और विजय का प्रतीक है.
  • 8 साल में बनकर तैयार हुआ यह किला भरतपुर राज्य के लिए स्वतंत्रता और आत्मसम्मान का गढ़ बन गया.
  • बंशी पहाड़पुर और बांध बरेठा से लाए गए पत्थरों से निर्मित इस किले की दीवारें 100 फीट ऊंची और 30 फीट चौड़ी थीं, जिसमें तोप के गोलों को सोखने के लिए रेत की परत थी.
  • 200 फीट चौड़ी और 30 फीट गहरी सुजान गंगा नहर ने अभेद्य सुरक्षा प्रदान की, जिससे किला ब्रिटिश हमलों के खिलाफ अजेय रहा.
  • 8 बुर्जों और दो मुख्य द्वारों वाला लोहागढ़ किला जाटों के आत्मसम्मान, दूरदर्शिता और असाधारण रणनीतिक कौशल का प्रमाण है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: महाराजा सूरजमल द्वारा बसंत पंचमी पर स्थापित लोहागढ़ किला जाटों के शौर्य और रणनीतिक प्रतिभा का अजेय प्रतीक है.

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