राजस्थान में 16वीं शताब्दी से प्रसिद्ध हैं कांवड़ कला। 
जयपुर
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News1820-01-2026, 16:01

राजस्थान की विश्वविख्यात कावड़ कला विलुप्ति के कगार पर, संरक्षण की अपील

  • राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात कावड़ कला, जो एक प्राचीन लोक कला है, अब लुप्त होने के कगार पर है.
  • यह कला चित्तौड़गढ़ के बस्सी गांव में 1652 में प्रभात जी सुथार द्वारा शुरू की गई थी, जिसमें पौराणिक कथाओं के चित्रण वाले पोर्टेबल लकड़ी के मंदिर बनाए जाते हैं.
  • कावड़ कला में तीन प्रकार के कारीगरों की आवश्यकता होती है: लकड़ी के कारीगर संरचना के लिए, चित्रकार चित्रण के लिए, और 'भाट' (कथावाचक) कहानियों को सुनाने के लिए.
  • चित्रों में आमतौर पर रामायण, महाभारत और लोक कथाओं की कहानियां होती हैं; राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता द्वारिका प्रसाद जांगिड़ एक प्रमुख कलाकार हैं.
  • कलाकार कावड़ कला को प्रासंगिक बनाए रखने और इसके पूर्ण विलुप्त होने से बचाने के लिए शैक्षिक और सामाजिक जागरूकता विषयों के साथ इसे अपना रहे हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: राजस्थान की अनूठी कावड़ कला, एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, खतरे में है और इसे तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है.

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