मऊर और डाल बनाते कारीगर...
बलिया
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News1818-02-2026, 15:33

अनमोल विरासत! शादी की शान है 'मऊर', इसके बिन तो पूरी शादी अधूरी.

  • बलिया का 'मऊर' एक गहरी लोक परंपरा है, जो जातियों और धर्मों से परे भारतीय संस्कृति की साझा विरासत है.
  • आधुनिकीकरण के बावजूद, 'मऊर' सम्मान, आस्था और परंपरा का प्रतीक बना हुआ है, जिसके बिना शादियां अधूरी मानी जाती हैं.
  • बलिया के हनुमान गंज में कारीगर 'मऊर' और अन्य विवाह संबंधी वस्तुएं बनाते हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी कौशल को संरक्षित करते हैं और आजीविका प्रदान करते हैं.
  • बांस, कागज, सितारों और फीते से सजा 'मऊर' हिंदू विवाहों में दूल्हे का मुकुट होता है, जो मुस्लिम 'सेहरा' से अलग है.
  • 'इमली घोटावन' से लेकर मंडप तक, 'मऊर' विवाह अनुष्ठानों का केंद्र है, जो दूल्हे के महत्व का प्रतीक है.

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