आईआईटी कानपुर ने कुम्हारी कला को दी नई पहचान, मिट्टी के कप बने रोजगार का जरिया.

कानपुर
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News18•12-01-2026, 18:24
आईआईटी कानपुर ने कुम्हारी कला को दी नई पहचान, मिट्टी के कप बने रोजगार का जरिया.
- •आईआईटी कानपुर के अंकित सिंह ने पारंपरिक कुम्हारी कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ा, जिससे मजबूत और आकर्षक मिट्टी के कप बन रहे हैं.
- •ये कप बिस्किट फायरिंग और 1000 डिग्री सेल्सियस पर पकाए जाते हैं, जिससे वे सामान्य कुल्हड़ों से अधिक मजबूत और सुरक्षित होते हैं.
- •इस पहल से ग्रामीण कुम्हार परिवारों, खासकर महिलाओं को रोजगार मिला है, जो कप डिजाइनिंग, मिट्टी की सफाई और फिनिशिंग में शामिल हैं.
- •नियमित ऑर्डर मिलने से कुम्हारों की आर्थिक स्थिति सुधरी है और पारंपरिक पेशे में उनका विश्वास मजबूत हुआ है.
- •नदी किनारे उगने वाली मूंज घास से मुड्ढे भी बनाए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय घास कारीगरों को भी रोजगार मिल रहा है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: आईआईटी कानपुर की पहल से कुम्हारी कला को नया जीवन मिला है, जिससे ग्रामीण कारीगरों को सशक्तिकरण और रोजगार मिल रहा है.
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