मौलाना का स्पष्टीकरण: इस्लाम में जबरन निकाह अमान्य, सहमति सर्वोपरि.

अलीगढ़
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News18•12-01-2026, 07:43
मौलाना का स्पष्टीकरण: इस्लाम में जबरन निकाह अमान्य, सहमति सर्वोपरि.
- •उत्तर प्रदेश के शाही मुख्य मुफ्ती, मौलाना चौधरी इब्राहिम हुसैन ने कहा कि इस्लाम में निकाह के लिए लड़की की स्वतंत्र सहमति आवश्यक है.
- •यदि कोई लड़की पारिवारिक दबाव में "कुबूल है" कहती है, तो ऐसा निकाह शून्य और अमान्य माना जाएगा, जिसकी कोई धार्मिक वैधता नहीं है.
- •इस्लाम में बोले गए शब्दों के साथ-साथ व्यक्ति के इरादे और दिल की गवाही को भी महत्व दिया जाता है; जबरन घोषणाएं मान्य नहीं हैं.
- •दबाव में किया गया निकाह पति-पत्नी के रिश्ते को भी नाजायज बना देता है.
- •मौलाना इब्राहिम हुसैन ने जोर दिया कि ऐसे जबरन निकाह का आयोजन करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मौलाना इब्राहिम हुसैन के अनुसार, लड़की की स्वतंत्र सहमति के बिना जबरन निकाह इस्लाम में अमान्य और नाजायज है.
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