कुमाऊं का झोड़ा नृत्य: एकता, आस्था और संस्कृति का जीवंत प्रतीक.

बागेश्वर
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News18•25-12-2025, 13:36
कुमाऊं का झोड़ा नृत्य: एकता, आस्था और संस्कृति का जीवंत प्रतीक.
- •उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र का झोड़ा नृत्य सामूहिक भावना, एकता और आस्था का प्रतीक है, जो सभी भेद मिटाता है.
- •यह पारंपरिक लोक नृत्य बिना किसी उम्र या प्रशिक्षण की बाधा के, एक घेरे में कंधे से कंधा मिलाकर किया जाता है.
- •इसके गीतों में हास्य, सामाजिक व्यंग्य, कृषि जीवन और शिव-पार्वती (गौरा-महेश) की धार्मिक कथाएं शामिल होती हैं.
- •बागेश्वर से इसका गहरा संबंध है, जहां यह मेलों, त्योहारों और विशेषकर उत्तरायणी मेले में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देता है.
- •झोड़ा आधुनिक युग में भी कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा रहा है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: झोड़ा कुमाऊं का एक ऐसा लोक नृत्य है जो आस्था, संस्कृति और समुदाय को जोड़ता है.
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