पहाड़ों में आज भी बनता है शुद्ध कुमकुम: आस्था, परंपरा और प्रकृति का संगम.

पिथौरागढ़
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News18•24-12-2025, 16:40
पहाड़ों में आज भी बनता है शुद्ध कुमकुम: आस्था, परंपरा और प्रकृति का संगम.
- •उत्तराखंड और कुमाऊं में सदियों से घरों में शुद्ध, रसायन-मुक्त कुमकुम बनाने की परंपरा जीवित है.
- •कुमकुम बनाने की प्रक्रिया में हल्दी को सुखाकर, पीसकर उसमें पहाड़ी नींबू का रस मिलाकर धूप में सुखाया जाता है.
- •यह केवल हल्दी, नींबू और धूप का मिश्रण है, जिसमें कोई रसायन या कृत्रिम रंग नहीं होता, शुद्धता इसकी पहचान है.
- •महिलाएं मिलकर कुमकुम बनाती हैं, पारंपरिक गीत गाती हैं, जिससे यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती है.
- •इसे शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जो पूजा, विवाह और अन्य शुभ अवसरों पर उपयोग होता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: पहाड़ी कुमकुम प्रकृति, आस्था और सामुदायिक भावना से जुड़ी एक शुद्ध, रसायन-मुक्त परंपरा है.
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