उत्तराखंड में जनेऊ संस्कार: उपनयन परंपरा और यज्ञोपवीत का महत्व
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पहाड़ों का अनोखा रिवाज: उत्तराखंड में दो बार क्यों होता है जनेऊ संस्कार?
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News18•26-02-2026, 19:50
पहाड़ों का अनोखा रिवाज: उत्तराखंड में दो बार क्यों होता है जनेऊ संस्कार?
•उत्तराखंड के पहाड़ों में जनेऊ (यज्ञोपवीत संस्कार) अत्यंत पवित्र है, जो लड़के के 'द्विज' बनने और ज्ञान व जिम्मेदारी के लिए तैयार होने का प्रतीक है.
•जनेऊ के तीन धागे सत्व, रजस, तमस और देव ऋण, ऋषि ऋण, पितृ ऋण का प्रतीक हैं, जो धर्म, अनुशासन और सत्य पर जोर देते हैं.
•पहले संस्कार में नवग्रह पूजन, ग्रह जाग, तुला दान और गायत्री मंत्र की दीक्षा के साथ तीन धागों वाला जनेऊ पहनाया जाता है, जो अनुशासन और सम्मान सिखाता है.
•एक अनूठी परंपरा 'दून बरपन' (नूतन यज्ञोपवीत) 3-4 दिन बाद होती है, जिसमें लड़का छह धागों वाला जनेऊ पहनता है, जो सख्त नियमों और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है.
•दून बरपन के दौरान, लड़का अपना सात्विक भोजन स्वयं बनाता है, आत्मनिर्भरता सीखता है और ग्रामीणों से आशीर्वाद प्राप्त करता है, जिससे सामाजिक और आध्यात्मिक संबंध मजबूत होते हैं.