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पहाड़ी शादियों का अनोखा रिवाज़: जानिए 'गुड्डा-गुड्डी' से समधी-समधन बनने की दिलचस्प कहानी.
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पहाड़ी शादियों का अनोखा रिवाज: 'गुड्डा-गुड्डी' बनते हैं समधी-समधन, जानिए कहानी.
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News18
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10-03-2026, 19:28
पहाड़ी शादियों का अनोखा रिवाज: 'गुड्डा-गुड्डी' बनते हैं समधी-समधन, जानिए कहानी.
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पिथौरागढ़ की देवभूमि संस्कृति में शादी का एक अनोखा रिवाज है, जहाँ 'गुड्डा-गुड्डी' (आटे की गुड़िया) समधी-समधन बनते हैं.
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प्राचीन काल में बाजार की सीमित उपलब्धता के कारण आटे से गुड़िया बनाई जाती थीं, जो प्रतीकात्मक रूप से वर-वधू के माता-पिता का प्रतिनिधित्व करती थीं.
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इस रस्म का उद्देश्य नए परिवारों के बीच सहजता लाना, हँसी-मजाक पैदा करना और रिश्तों को मजबूत करना है.
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आधुनिकता के बावजूद, भले ही अब बाजार से गुड़िया खरीदी जाती हैं, इस परंपरा का प्रेम और स्नेह भरा महत्व आज भी बरकरार है.
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ग्रामीण महिला हेमवंती देवी बताती हैं कि यह रस्म पहाड़ी संस्कृति और रिश्तों को जीवंत रखने का एक अनमोल तरीका है.
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