उत्तराखंड की भिटौली परंपरा: भाई को देख पगडंडियों पर झूम उठती है बहन, जानें इस खास पहाड़ी रिवाज का महत्व.
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उत्तराखंड की भिटौली परंपरा: बेटी और मायके का अटूट रिश्ता, जानें महत्व.
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News18•13-03-2026, 22:05
उत्तराखंड की भिटौली परंपरा: बेटी और मायके का अटूट रिश्ता, जानें महत्व.
•भिटौली उत्तराखंड की एक परंपरा है जो विवाहित बेटी और उसके मायके के बीच गहरे, अटूट भावनात्मक बंधन का प्रतीक है.
•पहाड़ों में दुर्गम रास्तों और परिवहन के अभाव के कारण यह परंपरा शुरू हुई, जिसमें माता-पिता या भाई बेटी से मिलने उपहार और विशेष व्यंजन लेकर जाते थे.
•भिटौली में पारंपरिक रूप से 'खजूर', 'अरसे', 'पूरी' जैसे हस्तनिर्मित पहाड़ी व्यंजन, नए कपड़े और सौंदर्य प्रसाधन शामिल होते हैं.
•चैत्र का महीना महत्वपूर्ण है; इस दौरान 'घुघुती' पक्षी का गाना मायके की याद दिलाता है, जैसा कि लोकगीत "ना बासा घुघुती चैत की, याद आ जैछे मैके मैते की" में व्यक्त है.
•आधुनिक समय में बदलाव के बावजूद, भिटौली परंपरा आज भी जीवंत है, जिसमें मायके वाले चैत्र माह में अपनी विवाहित बहन या बेटी को भिटौली देते हैं.