मकर संक्रांति के दूसरे दिन कुमाऊं में मास की खिचड़ी कौवे को अर्पित की जाती है
नैनीताल
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News1814-01-2026, 16:24

कुमाऊं में मकर संक्रांति: 'मास की खिचड़ी' और घुघुतिया त्योहार की अनोखी परंपरा

  • उत्तराखंड के कुमाऊं में मकर संक्रांति को घुघुतिया त्योहार या उत्तरायणी के नाम से मनाया जाता है, जो माघ महीने की शुरुआत का प्रतीक है.
  • अनोखी परंपराओं में बच्चों के लिए 'घुघुते' (आटे और गुड़ से बनी मिठाई) बनाना और मकर संक्रांति के अगले दिन उन्हें 'मास की खिचड़ी' के साथ कौवों को अर्पित करना शामिल है.
  • प्रोफेसर ललित तिवारी द्वारा समझाई गई 'मास की खिचड़ी' की परंपरा, सूर्य देव को अर्पित करने के बाद खिचड़ी को धार्मिक प्रसाद के रूप में खाने की सदियों पुरानी प्रथा है.
  • यह परंपरा सूर्य देव के दक्षिणायन से उत्तरायण में जाने से जुड़ी है, जो सकारात्मक ऊर्जा और बढ़ी हुई चमक का प्रतीक है, और 'सूर्य दोष' व 'शनि दोष' को कम करने वाली मानी जाती है.
  • कुमाऊं में मकर संक्रांति एक सांस्कृतिक विरासत है, जो लोक आस्था, प्रकृति और परंपरा के गहरे संबंधों को दर्शाती है, उत्तरायणी के बाद मौसम में बदलाव भी देखा जाता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: कुमाऊं की मकर संक्रांति लोक आस्था, प्रकृति और परंपरा का अनूठा संगम है, जिसमें 'मास की खिचड़ी' और 'घुघुते' का विशेष महत्व है.

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