BRICS+ is a genuinely international grouping spanning Eurasia, Africa, and South America that was formed in 2009 to call for more adequate representation in the IMF’s Special Drawing Rights. (PTI)
ओपिनियन
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News1801-01-2026, 14:49

BRICS: बहुध्रुवीय विश्व में भारत की 'पंचमुख' रणनीति, पुरानी व्यवस्था को चुनौती.

  • BRICS+ का विस्तार 11 पूर्ण सदस्यों और 10 भागीदार देशों तक हो गया है, जो एकध्रुवीयता से बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था की ओर महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाता है.
  • डी-डॉलरकरण और भारत के UPI जैसे नए भुगतान प्रणाली BRICS+ के प्रमुख पहचान चिह्न हैं, जो अमेरिकी आर्थिक प्रभुत्व को चुनौती दे रहे हैं.
  • द्विपक्षीय मुद्राओं के माध्यम से रूस के साथ भारत के रणनीतिक संबंध मजबूत हो रहे हैं, जबकि पिछली तनावों के बावजूद भारत-चीन आर्थिक पुनर्संतुलन की संभावना है.
  • पुरानी विश्व व्यवस्था (G7, NATO) कमजोर होती दिख रही है, जबकि SCO, G20 और C-5 जैसे नए समूह वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाते हुए गति पकड़ रहे हैं.
  • भारत को BRICS के भीतर अपनी स्थिति का लाभ उठाने और बदलते वैश्विक परिदृश्य में सफल होने के लिए तेजी से आर्थिक विकास और सुधार को प्राथमिकता देनी चाहिए.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: BRICS+ एक नए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का प्रतीक है जहाँ भारत को तेजी से समृद्धि बनानी चाहिए और पुरानी वर्चस्व को चुनौती देनी चाहिए.

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