A Border Security Force (BSF) official stands in front of the gates of the India-Bangladesh international border in Petrapole, India, October 16, 2024. Reuters/Sahiba Chawdhary/File Photo
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Firstpost26-12-2025, 11:17

भारत-बांग्लादेश संबंध संकट में: बढ़ती भारत-विरोधी भावना के बीच रणनीतिक बदलाव आवश्यक.

  • अवामी लीग के पतन के बाद, बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावना बढ़ी, शरीफ उस्मान हादी की मौत और भारतीय मिशनों पर हमलों से यह और भड़की, जिससे वीजा सेवाएं निलंबित हुईं.
  • दीपु चंद्र दास की लिंचिंग जैसी घटनाओं से सांप्रदायिक तनाव बढ़ा, इस्लामी गुटों को बढ़ावा मिला और हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर राजनयिक तनाव पैदा हुआ.
  • सुरक्षा सहयोग तनाव में है; भारत को चरमपंथी समूहों के फिर से संगठित होने का डर है, जिससे पूर्वोत्तर की सुरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव को खतरा है, खासकर बांग्लादेश के चीन और पाकिस्तान की ओर झुकाव से.
  • बांग्लादेश की विदेश नीति में विविधता आने से व्यापार और कनेक्टिविटी परियोजनाएं बाधित हुई हैं, जिससे भारत की "पड़ोसी पहले" नीति प्रभावित हुई है और चीन-पाकिस्तान के साथ "त्रिपक्षीय धुरी" की चिंताएं बढ़ी हैं.
  • भारत को संभावित "तीन-मोर्चे" सुरक्षा चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास सैन्य बुनियादी ढांचे, रणनीतिक बंदरगाहों तक पहुंच और ISI/विद्रोही गतिविधियों में वृद्धि की चिंताएं शामिल हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत-बांग्लादेश संबंध महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए रणनीतिक बदलाव की मांग है.

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