शेख हसीना की मौत की सज़ा: 'अधूरा मुक़दमा' न्याय नहीं, ख़तरनाक बयानबाज़ी है.

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Firstpost•26-12-2025, 16:49
शेख हसीना की मौत की सज़ा: 'अधूरा मुक़दमा' न्याय नहीं, ख़तरनाक बयानबाज़ी है.
- •बांग्लादेश हाई कमीशन के प्रेस मंत्री फ़ैसल महमूद ने शेख हसीना की सज़ा को कानूनी खामियों को नज़रअंदाज़ करते हुए सही ठहराया है.
- •लेखक का तर्क है कि "बड़े पैमाने पर अत्याचार" एक कानूनी वर्गीकरण है जिसके लिए उचित संदेह से परे सबूत चाहिए, न कि "अधूरे मुक़दमे" का बहाना.
- •अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण अधिनियम (ICTA) की संवैधानिक वैधता और जुलाई-अगस्त 2024 के कृत्यों का "मानवता के खिलाफ अपराध" (CAH) की सीमा को पूरा करने पर सवाल उठाए गए हैं.
- •कमांड-जिम्मेदारी के आरोप, राज्य-नियुक्त बचाव पक्ष के वकील और न्यायाधिकरण की संरचना पर संदेह है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं.
- •लेख ज़ोर देता है कि सच्ची जवाबदेही के लिए निष्पक्ष अदालतें, गहन जांच और उच्चतम मानकों को पूरा करने वाले मुक़दमे ज़रूरी हैं, न कि राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रक्रियाएं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: शेख हसीना का 'अधूरा मुक़दमा' न्याय और कानून के शासन को कमज़ोर करता है.
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