The blood boils when the UNHCR chooses to remain completely silent on the gruesome public lynching of Dipu Chandra Das on mere allegations of blasphemy.
ओपिनियन
N
News1830-12-2025, 15:15

बांग्लादेशी हिंदुओं पर पश्चिम की चुप्पी: नैतिक विफलता और दोहरा मापदंड.

  • बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ अत्याचारों पर पश्चिम की "नैतिक विफलता" और "घोर पाखंड" की आलोचना की गई है, जिसका उदाहरण दीपू चंद्र दास की लिंचिंग है.
  • बीबीसी और अल जज़ीरा जैसे पश्चिमी मीडिया पर झूठी समानताएं बनाने और बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न से ध्यान भटकाने का आरोप है, इसे भारत की घटनाओं से तुलना करके.
  • बीबीसी की कवरेज में पाकिस्तानी-इस्लामी स्थिति के प्रति संरचनात्मक और कथात्मक पूर्वाग्रह पर प्रकाश डाला गया है, जो अक्सर पाकिस्तानी मूल के पत्रकारों से प्रभावित होता है.
  • पश्चिमी विमर्श हिंदुओं को नरसंहार या जातीय सफाए के पीड़ितों के रूप में स्वीकार करने में विफल रहता है, उन्हें अक्सर "बहुसंख्यक" और "दमनकारी" के रूप में चित्रित करता है, भले ही व्यवस्थित हिंसा हो.
  • ध्रुव राठी और आरफा खानम शेरवानी जैसे भारतीय "फिफ्थ कॉलमनिस्ट" पर इस पश्चिमी कथा को अपनाने और हिंदुओं के दुख पर चुप रहने का आरोप है, जबकि अन्य वैश्विक मुद्दों पर मुखर रहते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: पश्चिम का चयनात्मक आक्रोश और मीडिया पूर्वाग्रह बांग्लादेशी हिंदुओं को विफल कर रहा है, जो उपनिवेशवाद-पश्चात आख्यानों से प्रेरित है.

More like this

Loading more articles...