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News1826-12-2025, 09:23

शेखावाटी में रबी फसलों के लिए 'सोना' बनी कड़ाके की ठंड की ओस, बंपर पैदावार की उम्मीद.

  • दिसंबर के अंत में कड़ाके की ठंड और ओस शेखावाटी में रबी फसलों, विशेषकर गेहूं और चना के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे पैदावार बढ़ने की उम्मीद है.
  • ओस प्राकृतिक नमी प्रदान करती है, जो सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, बीज अंकुरण और पौधों के विकास में सहायता करती है.
  • कृषि विशेषज्ञ एस.आर. कटारिया के अनुसार, ओस में मौजूद नाइट्रोजन प्राकृतिक यूरिया का काम करती है, जिससे किसानों की उर्वरक लागत कम होती है.
  • ओस गेहूं में जड़ विकास, दाने की गुणवत्ता और आकार में सुधार करती है, जबकि चने में फूल और फली गिरने की समस्या कम करती है और सरसों में तेल की मात्रा बढ़ाती है.
  • यह प्राकृतिक नमी फसलों में कीटों के प्रकोप को भी कम करती है और प्रतिकूल मौसम की स्थिति से पौधों पर पड़ने वाले तनाव को घटाती है, जिससे स्वस्थ विकास सुनिश्चित होता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: कड़ाके की ठंड की ओस रबी फसलों के लिए 'सोना' है, पैदावार बढ़ाती है और किसानों की लागत कम करती है.

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