समस्तीपुर जिले के एक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत आयुर्वेदाचार्य डॉ. बालेश्वर शर्मा बताते हैं कि मिथिलांचल में पान खाने की परंपरा सदियों पुरानी है. उन्होंने साफ किया कि पान किसी भी तरह से नशे की वस्तु नहीं है, बल्कि इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. पान का सेवन करने से मुंह की सफाई होती है और मुंह के अंदर मौजूद हानिकारक जीवाणु नष्ट होते हैं. इससे दुर्गंध की समस्या स्थायी रूप से दूर होती है.
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News1822-01-2026, 20:31

2 रुपये का पत्ता अमृत समान: पेट और सांसों को दुरुस्त रखने के फायदे

  • पान (सुपारी का पत्ता) पारंपरिक रूप से स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ के लिए भी खाया जाता था, जो पाचन और मौखिक स्वच्छता में मदद करता है.
  • समस्तीपुर के आयुर्वेदाचार्य डॉ. बालेश्वर शर्मा ने पान के औषधीय गुणों पर प्रकाश डाला, यह स्पष्ट करते हुए कि यह नशीला पदार्थ नहीं है.
  • पान मुंह को साफ करता है, हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करके सांसों की दुर्गंध को दूर करता है और पाचन में सुधार करता है.
  • आयुर्वेद के अनुसार, यह कफ और पित्त को संतुलित करता है, रक्त को शुद्ध करता है और शरीर की 'अग्नि' (पाचन अग्नि) को मजबूत करता है.
  • नियमित, शुद्ध पान का सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और खांसी, जुकाम से राहत देता है, बच्चों के दस्त में भी सहायक है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: शुद्ध रूप से सेवन करने पर पान पाचन, मौखिक स्वच्छता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है.

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