ऐसे बच्‍चे भले ही पढ़ाई में 99% अंक ले आते हैं, लेकिन जीवन की वास्तविक चुनौतियों के सामने अक्सर टूट जाते हैं.
पालन पोषण
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News1806-02-2026, 10:23

बच्चों को 'ना' कहना क्यों है ज़रूरी: 99% अंक लाने वाले भी हो सकते हैं असफल!

  • मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जिन बच्चों को घर पर कभी 'ना' नहीं सुनने को मिलता, वे मानसिक रूप से एकतरफा विकसित होते हैं और जीवन की चुनौतियों में टूट जाते हैं.
  • हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोध के अनुसार, 'एग्जीक्यूटिव फंक्शन' और 'सेल्फ-रेगुलेशन' बच्चों के मस्तिष्क के विकास के लिए आवश्यक हैं; हर मांग पूरी होने से 'इंपल्स कंट्रोल' विकसित नहीं होता.
  • चाइल्ड माइंड इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि सीमाओं का ज्ञान न रखने वाले बच्चों में 'फ्रस्ट्रेशन टॉलरेंस' बहुत कम होती है, जिससे वे डिप्रेशन और एंग्जायटी का शिकार होते हैं.
  • प्रसिद्ध 'स्टैनफोर्ड मार्शमैलो एक्सपेरिमेंट' ने दर्शाया कि तत्काल संतुष्टि में देरी करने वाले बच्चे भविष्य में अधिक सफल और मानसिक रूप से स्थिर पाए गए.
  • 'ना' कहना एक प्रकार का 'इमोशनल वैक्सीनेशन' है, जो बच्चों में भावनात्मक प्रतिरोधक क्षमता, रचनात्मकता और संसाधनशीलता बढ़ाता है, उन्हें धैर्य और लचीलापन सिखाता है.

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