रीवा: झीलों की नगरी का शाही इतिहास और आध्यात्मिक विरासत

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News18•09-01-2026, 22:02
रीवा: झीलों की नगरी का शाही इतिहास और आध्यात्मिक विरासत
- •रीवा को 'झीलों की नगरी' का खिताब शाही पहलों से मिला, जिसकी शुरुआत महारानी सुभद्रा कुंवारी ने राज्य की समृद्धि और वंश वृद्धि के लिए की थी.
- •दंडी ऋषि की सलाह पर महारानी सुभद्रा कुंवारी ने सिरमौर में 12 एकड़ का भव्य तालाब और विजय राघव मंदिर बनवाया, जिसमें उन्होंने स्वयं श्रमदान किया.
- •रीवा में गोविंदगढ़ झील और महल है, जो प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक विरासत का संगम है, जिसे 'आनंद का खजाना' भी कहा जाता है.
- •मध्य प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा गोविंदगढ़ तालाब महाराजा विश्वनाथ सिंह और बाद में महाराजा वेंकट रमण सिंह जूदेव द्वारा विस्तारित किया गया, जिसके लिए एक बस्ती को विस्थापित किया गया था.
- •रानी तालाब की कहानी लवना समुदाय द्वारा महारानी कुंदन कुंवारी को उपहार में दिए जाने से जुड़ी है और इसमें प्राचीन मां कालिका मंदिर, एक सिद्धपीठ, स्थित है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: रीवा की 'झीलों की नगरी' के रूप में पहचान उसके शाही इतिहास, आध्यात्मिक मान्यताओं और स्थापत्य चमत्कारों में गहराई से निहित है.
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