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भीनमाल का इतिहास जीवंत होता है: साल में एक बार गूंजने वाले बाबैया ढोल की पूरी कहानी.
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भीनमाल का बाबैया ढोल: साल में एक दिन गूंजता इतिहास, जानें पूरी कहानी.
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News18
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04-03-2026, 00:21
भीनमाल का बाबैया ढोल: साल में एक दिन गूंजता इतिहास, जानें पूरी कहानी.
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भीनमाल का बाबैया ढोल साल में सिर्फ एक दिन होली के दूसरे दिन गूंजता है, 'घोटा गैर' की शुरुआत का संकेत देता है.
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यह सिर्फ एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि भीनमाल की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है.
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सामान्य ढोल से बड़ा और भारी, इसकी गहरी, शक्तिशाली धुन दूर-दूर तक सुनाई देती है और शहर को एकजुट करती है.
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पीढ़ियों से एक ही परिवार द्वारा बजाया जाता है, यह परंपरा और सम्मान के साथ जुड़ा है और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं.
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बड़े चौहटा पर इसकी गूंज उत्साह भर देती है, भीनमाल की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जीवंतता को दर्शाती है.
News18 पर हिंदी में पूरा लेख पढ़ें
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