बिहार की होली: बाबू वीर कुंवर सिंह का लोकगीत 'बंगला में उड़ेला अबीर' और उसका महत्व.
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News1802-03-2026, 11:14

बिहार की होली: बाबू वीर कुंवर सिंह का लोकगीत 'बंगला में उड़ेला अबीर' और उसका महत्व.

  • बिहार में होली, जिसे 'फगुआ' कहते हैं, लोक धुनों, ऐतिहासिक शौर्य और सामुदायिक एकता का संगम है, जिसकी तैयारी बसंत पंचमी से शुरू होती है.
  • एक विशेष भोजपुरी लोकगीत, "बंगला में उड़ेला अबीर," 1857 के स्वतंत्रता सेनानी बाबू कुंवर सिंह का सम्मान करता है, जिन्होंने 80 साल की उम्र में अंग्रेजों को हराया था.
  • यह गीत जगदीशपुर स्थित उनके निवास पर कुंवर सिंह के आनंदमय होली समारोह को याद करता है, उनकी बहादुरी का सम्मान करता है.
  • फगुआ गीत सामाजिक एकता के प्रतीक हैं, प्रकृति के बीच खुशी व्यक्त करते हैं, पौराणिक संदर्भ शामिल करते हैं और क्षेत्रीय विरासत को संरक्षित करते हैं.
  • बिहार की होली का आनंद 'फगुआ' संगीत में निहित है, जो गौरवशाली इतिहास को वर्तमान समारोहों से जोड़ता है, जिससे यह गीत गर्व का प्रतीक बन जाता है.

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