क्या है चीरबंधन की परंपरा 
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News1827-02-2026, 16:58

पहाड़ों की होली का अनूठा चीरबंधन: एकता और समृद्धि का प्रतीक, जानें पूरी परंपरा.

  • चीरबंधन पहाड़ों में होली की एक अनूठी परंपरा है, जहाँ ग्रामीण अपने घरों से कपड़े के टुकड़े एक खंभे पर बाँधते हैं, जो एकता और सामूहिक भागीदारी का प्रतीक है.
  • यह अनुष्ठान रंगभरी एकादशी से शुरू होता है, जिसमें ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-दमाऊ की थाप पर होली के गीत गाते हुए 'चीर' को औपचारिक रूप से बाँधते हैं.
  • प्रत्येक घर की भागीदारी महत्वपूर्ण है, यह संदेश पुष्ट करती है कि गाँव की समृद्धि एक साझा जिम्मेदारी है और भाईचारे को मजबूत करती है.
  • 'चीर' को हर उस घर में ले जाया जाता है जहाँ होली के गीत गाए जाते हैं, माना जाता है कि यह शांति, खुशी और समृद्धि लाता है, पूरे गाँव को एक साथ जोड़ता है.
  • त्योहार का समापन 'चलेड़ी' के साथ होता है, जहाँ 'चीर' के आधे कपड़े नकारात्मकता को दूर करने के लिए अग्नि को अर्पित किए जाते हैं, और शेष टुकड़े घरों में सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा के लिए वितरित किए जाते हैं.

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