Kant also stressed the power of AI to democratise communication. He cited the real-time translation of the Union Budget speech into 18 languages as an example of how AI can break linguistic barriers and deepen inclusion. Regional dialects, tier-two and tier-three cities, and rural audiences, he suggested, represent the next frontier for brands armed with intelligent localisation tools.
विशेष कवरेज
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Storyboard07-02-2026, 09:40

अमिताभ कांत: AI रचनात्मकता बढ़ा सकता है, पर CMO की जगह नहीं ले सकता.

  • पूर्व G20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा कि AI रचनात्मकता को बढ़ा सकता है, लेकिन ब्रांड-निर्माण में मानवीय आत्मा की जगह नहीं ले सकता है.
  • उन्होंने 'गॉड्स ओन कंट्री' और 'इंक्रेडिबल इंडिया' अभियानों का हवाला देते हुए स्थायी ब्रांडों के लिए विशिष्टता और अद्वितीय अनुभवों को आधार बताया.
  • कांत ने AI को एक उत्पादकता इंजन के रूप में उजागर किया जो वास्तविक समय के डेटा, भविष्य कहनेवाला अंतर्दृष्टि और हाइपर-पर्सनलाइजेशन के साथ मार्केटिंग को बदल रहा है.
  • उन्होंने बताया कि भारत का विशाल डिजिटल डेटा वैश्विक AI मॉडल को फीड करता है, और सांस्कृतिक संप्रभुता के लिए भारत को अपने LLM बनाने का आग्रह किया.
  • कांत ने चेतावनी दी कि एल्गोरिदम को ब्रांड की आत्मा को नष्ट नहीं करने देना चाहिए, यह जोर देते हुए कि महान अभियानों के लिए मानवीय ज्ञान की आवश्यकता होती है और वे पूरी तरह से AI-जनित नहीं हो सकते.

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