UNESCO’s recognition brings Ramcharitmanas back into focus. (Photo Credit: Instagram)
वायरल
N
News1802-01-2026, 13:00

तुलसीदास की रामचरितमानस पांडुलिपियां यूनेस्को रजिस्टर में, अयोध्या कांड सुरक्षित.

  • तुलसीदास की रामचरितमानस की सचित्र पांडुलिपियों को मई 2024 में यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर में शामिल किया गया.
  • इस सूची में तुलसीदास द्वारा लिखित मानी जाने वाली 16वीं सदी की पांडुलिपि और 18वीं सदी का अरबी अनुवाद शामिल है, जो इसके वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है.
  • मूल रामचरितमानस का केवल अयोध्या कांड (165 पृष्ठों का खंड) ही आज बचा है, जो उत्तर प्रदेश के राजापुर में संरक्षित है.
  • अन्य छह कांड सदियों पहले तब खो गए थे जब एक शिष्य ने भागने की कोशिश में पांडुलिपि को गंगा नदी में फेंक दिया था.
  • बचे हुए अयोध्या कांड का 2004 में एएसआई द्वारा रासायनिक उपचार किया गया और संरक्षण के लिए जापानी कागज से लेमिनेट किया गया, अब यह एक तिजोरी में रखा है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: यूनेस्को ने तुलसीदास की रामचरितमानस को मान्यता दी, मूल अयोध्या कांड के नाजुक अस्तित्व पर प्रकाश डाला.

More like this

Loading more articles...