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News1828-01-2026, 20:15

दिल्ली HC ने जमे हुए भ्रूण गोद लेने पर प्रतिबंध के खिलाफ याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा.

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र, स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी और सरोगेसी बोर्ड से जमे हुए भ्रूण गोद लेने पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर जवाब देने को कहा है.
  • आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. अनिरुद्ध नारायण मालपानी द्वारा दायर जनहित याचिका ART अधिनियम, 2021 की धारा 25(2), 27(5), 28(2), 29 और नियम 13(1)(a) को चुनौती देती है.
  • ये प्रावधान कथित तौर पर बांझ दंपतियों के बीच जमे हुए भ्रूणों के स्वैच्छिक और सहमति-आधारित दान को रोकते हैं.
  • याचिका में तर्क दिया गया है कि यह प्रतिबंध भेदभावपूर्ण है, संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह डबल-डोनर आईवीएफ की तुलना में बांझ दंपतियों के साथ अनुचित व्यवहार करता है.
  • भ्रूण गोद लेने को डबल-डोनर आईवीएफ के समान बताया गया है, जिसमें प्राप्तकर्ता महिला गर्भावस्था को स्वयं वहन करती है और सरोगेसी या तीसरे पक्ष की गर्भावस्था को शामिल किए बिना पूरी माता-पिता की जिम्मेदारी लेती है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: दिल्ली HC ने ART अधिनियम, 2021 के तहत जमे हुए भ्रूण गोद लेने पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है.

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