
एक विवाहित पुरुष पर एक वयस्क महिला के साथ सहमति से लिव-इन संबंध में रहने के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शाहजहांपुर मामले में भारतीय न्याय संहिता की विशिष्ट धारा का उल्लेख नहीं किया गया है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नैतिकता और कानून के बीच अंतर करते हुए कहा कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक कार्रवाई सामाजिक राय या नैतिकता से निर्देशित नहीं होनी चाहिए।