2026 तक भारतीय उपभोक्ता 'स्वस्थ भोजन' को दावों और लेबलों से परे परिभाषित कर रहे हैं

जीवनशैली
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News18•20-01-2026, 06:39
2026 तक भारतीय उपभोक्ता 'स्वस्थ भोजन' को दावों और लेबलों से परे परिभाषित कर रहे हैं
- •भारतीय उपभोक्ता मार्केटिंग दावों से हटकर सचेत विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जो विश्वास, परिचितता और भोजन उन्हें कैसा महसूस कराता है, उसे प्राथमिकता दे रहे हैं.
- •द बेकर्स डजन और टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स जैसे ब्रांड कृत्रिम एडिटिव्स के बजाय पारदर्शिता, सरल सामग्री और प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर जोर दे रहे हैं.
- •स्वास्थ्य के लिए स्वाद अब कोई समझौता नहीं है; उपभोक्ता दोनों की उम्मीद करते हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण सामग्री और पारंपरिक तैयारी के तरीकों पर ध्यान केंद्रित होता है.
- •ट्रेंड-आधारित उत्पादों से हटकर रोजमर्रा के जीवन में निहित सरल, परिचित और समझने योग्य खाद्य पदार्थों की ओर बदलाव हो रहा है.
- •परिचालन पारदर्शिता, ताजगी और सुरक्षा महत्वपूर्ण हैं, खासकर ताजे उत्पादों और मील किट के लिए, प्लक्क जैसे ब्रांड ट्रेसबिलिटी और स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारतीय उपभोक्ता जानबूझकर खाने की दिशा में क्रांति ला रहे हैं, पारदर्शिता, वास्तविक सामग्री और प्रामाणिक स्वाद की मांग कर रहे हैं.
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