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Moneycontrol19-12-2025, 18:21

SHANTI बिल: भारत के परमाणु क्षेत्र में निजी प्रवेश, मजबूत सुरक्षा, सीमित देयता.

  • SHANTI बिल निजी भारतीय कंपनियों और संयुक्त उद्यमों को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण, स्वामित्व और संचालन की अनुमति देता है, जिससे राज्य-संचालित एकाधिकार समाप्त हो गया है.
  • यह परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा उपायों और देयता के लिए एक नया कानूनी ढांचा स्थापित करता है, Atomic Energy Regulatory Board (AERB) को वैधानिक समर्थन के साथ मजबूत करता है.
  • एक श्रेणीबद्ध मुआवजा ढांचा ऑपरेटर की देयता को थर्मल क्षमता से जोड़ता है, जिसमें प्रति घटना 100 करोड़ रुपये से 3,000 करोड़ रुपये तक की सीमा होती है, और केंद्र सरकार इन सीमाओं से परे दावों को कवर करती है.
  • केंद्र सरकार सभी परमाणु सामग्री, ईंधन आपूर्ति और संवर्धन जैसी रणनीतिक गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रखती है, निजी ऑपरेटरों को परमाणु ईंधन का स्वामित्व रखने से प्रतिबंधित किया गया है.
  • देयता सीमाओं की पर्याप्तता के बारे में चिंताएं मौजूद हैं, आलोचकों का तर्क है कि संभावित बड़ी परमाणु आपदाओं के लिए ये बहुत कम हैं, और आपूर्तिकर्ता की जवाबदेही में कमी आई है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: SHANTI बिल नए सुरक्षा नियमों और देयता सीमाओं के साथ भारत के परमाणु क्षेत्र को निजी खिलाड़ियों के लिए खोलता है.

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